महाभारत में कौरवों के पास थीं सभी सुख-सुविधाएं, लेकिन सभी अधर्मी हो गए, कुंती ने अभावों में भी पांडवों के दिए अच्छे संस्कार

बच्चों के पालन-पोषण में शिक्षा और संस्कार का समावेश होना बहुत जरूरी है। इन दोनों बातों में की गई लापरवाही बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर सकती है। शिक्षा और संस्कार से बच्चे सही और गलत कर्मों में फर्क कर सकते हैं और सही मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। महाभारत में कौरवों और पांडवों के परिवार से बच्चों के सुखी और सफल जीवन के सूत्र सीख सकते हैं।

  • सुख-सुविधा से नहीं, संस्कारों से सुधरता है बच्चों का जीवन

महाभारत में एक ही परिवार के दो भाग हैं। एक है कौरव और दूसरा है पांडव। कौरवों में धृतराष्ट्र, गांधारी और उनके सौ पुत्र मुख्य हैं, जबकि पांडवों में माता कुंती और पांचों पांडव पुत्र मुख्य हैं।

कौरवों के पास सभी सुख और ऐश्वर्य था, लेकिन माता-पिता अत्यधिक मोह और प्रेम के कारण संतानों को सही शिक्षा और संस्कार नहीं दे सके। दूसरी तरफ है माता कुंती, जिसने पांचों पांडव पुत्रों को श्रेष्ठ शिक्षा और संस्कार दिए। महाराज पांडु और माद्री की मृत्यु के बाद कुंती ने ही पांचों पुत्रों का पालन-पोषण किया।

पांडवों के पास कौरवों के समान सुख-सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन शिक्षा और संस्कार के कारण वे धर्म के मार्ग पर चले और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की।

आज भी जो माता-पिता अपने बच्चों के लिए शिक्षा और संस्कार का पूरा ध्यान रखते हैं, उनके बच्चे आजीवन सुखी रहते हैं।



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महाभारत में कौरवों के पास थीं सभी सुख-सुविधाएं, लेकिन सभी अधर्मी हो गए, कुंती ने अभावों में भी पांडवों के दिए अच्छे संस्कार महाभारत में कौरवों के पास थीं सभी सुख-सुविधाएं, लेकिन सभी अधर्मी हो गए, कुंती ने अभावों में भी पांडवों के दिए अच्छे संस्कार Reviewed by Prbnews on August 28, 2020 Rating: 5

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