कौरव पक्ष के सभी बड़े योद्धा मारे जा चुके थे, युद्ध अंतिम चरण में था, उस समय अश्वथामा पांडवों के शिविर में चुपचाप गया और द्रौपदी के पांचों पुत्रों का मार डाला

महाभारत युद्ध में कौरव पक्ष के सभी बड़े योद्धा मारे जा चुके थे। युद्ध अंतिम चरण में था। उस समय अश्वथामा युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव से अपने पिता द्रोणाचार्य के वध का बदला भी लेना चाहता था। वह बहुत क्रोधित था। एक रात वह चुपचाप पांडवों के शिविर में पहुंच गया। अश्वथामा सभी पांडवों को सोते हुए ही मार डालना चाहता था।

जब अश्वथामा पांडवों के शिविर में पहुंचा तो वहां उसने पांच व्यक्तियों को सोते हुए देखा तो उसने सोचा कि यही पांचों पांडव हैं। ऐसा सोचकर अश्वथामा ने उन पांचों का वध कर दिया। ये पांचों द्रौपदी के पांच पुत्र थे। जिन्हें अश्वथामा ने पांडव समझकर मार दिया था।

जब ये बात पांडवों को मालूम हुई तो उन्होंने तुरंत ही अश्वथामा को पकड़कर बंदी बना लिया। पांडव अश्वथामा को द्रौपदी के सामने ले गए। सभी पांडवों ने द्रौपदी से कहा कि अश्वथामा ने जो काम किया है, उसकी सजा तुम ही तय करो। तुम अगर कहो तो हम अभी इसे मृत्युदंड दे देते हैं। इसके लिए यही सजा सही है।

द्रौपदी के पांचों पुत्र मारे जा चुके थे, लेकिन वह अश्वथामा की माता कृपी के बारे में सोच रही थी। उसकी ममता जीवित थी। द्रौपदी ने पांडवों से कहा कि हमें इसे मृत्यु दंड नहीं देना चाहिए। मैं नहीं चाहती कि पुत्रों की मृत्यु पर जो दुख मुझे हो रही है, वही दर्द गुरु माता कृपी को भी हो। द्रौपदी ने यहां दूसरी माता कृपी का भावनाओं को समझते हुए अश्वथामा को मृत्युदंड नहीं दिया।

सभी पांडवों ने द्रौपदी की बात समझकर अश्वथामा के माथे पर लगी मणि निकाल ली। उसे कुरूप बना दिया और गुरु द्रोणाचार्य और माता कृपी के पुत्र को जीवित छोड़ दिया। इस प्रसंग की सीख यही है कि एक मां दूसरी मां की भावनाओं को अच्छी तरह समझती है।



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कौरव पक्ष के सभी बड़े योद्धा मारे जा चुके थे, युद्ध अंतिम चरण में था, उस समय अश्वथामा पांडवों के शिविर में चुपचाप गया और द्रौपदी के पांचों पुत्रों का मार डाला कौरव पक्ष के सभी बड़े योद्धा मारे जा चुके थे, युद्ध अंतिम चरण में था, उस समय अश्वथामा पांडवों के शिविर में चुपचाप गया और द्रौपदी के पांचों पुत्रों का मार डाला Reviewed by Prbnews on August 19, 2020 Rating: 5

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