श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी है तुलसी के बिना, वैज्ञानिक शोध के अनुसार तुलसी में होता है एंटीऑक्सीडेंट जो मृत कोशिकाओं को ठीक करने में होता है मददगार

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। जिस तरह भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी महत्वपूर्ण है। उसी तरह श्रीकृष्ण की पूजा में भी इसका महत्व है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार तुलसी के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। अनेक व्रत और धर्म कथाओं में तुलसी का महत्व बताया गया है। तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ये पौधा अपने वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय गुणों के कारण महत्वपूर्ण है। तुलसी के पौधे का महत्व पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त, स्कंद और भविष्य पुराण के साथ गरुड़ पुराण में भी बताया गया है। इन पौराणिक ग्रंथों के अलावा आयुर्वेद और विज्ञान ने भी इस पौधे को पर्यावरण एवं स्वस्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना है।

तुलसी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

  1. गरुड़ पुराण के धर्म काण्ड के प्रेत कल्प में लिखा है कि तुलसी का पौधा लगाने, उसे सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्म के पाप खत्म हो जाते हैं।
  2. ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में लिखा है कि मृत्यु के समय जो तुलसी पत्ते सहित जल पीता है वह हर तरह के पापों से मुक्त हो जाता है।
  3. स्कन्द पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है और हर दिन उसकी पूजा होती है तो ऐसे घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते।
  4. स्कन्द पुराण के ही अनुसार बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित हैं परन्तु तुलसीदल और गंगाजल बासी होने पर भी वर्जित नहीं हैं। यानी ये दाेनों चीजें अपवित्र नहीं मानी जाती।
  5. ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में लिखा है कि घर में लगाई हुई तुलसी मनुष्यों के लिए कल्याणकारिणी, धन पुत्र प्रदान करने वाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देने वाली होती है। सुबह-सुबह तुलसी का दर्शन करने से सवा मासा यानी सवा ग्राम सोने के दान का फल मिलता है।
  6. ज्योतिर्विज्ञान के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वहां वास्तुदोष नहीं होता है। इस पौधे को घर के पूर्व-उत्तर कोने में लगाना चाहिए। वहीं भविष्य पुराण में भी लिखा है कि तुलसी का पौधा घर के दक्षिणी भाग में नहीं लगाना चाहिए। इससे दोष लगता है।


तुलसी का आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक महत्व

  1. आयुर्वेद में कईं औषधियां तुलसी के पत्तों से मिलकर बनती हैं। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्तों में पारा होता है, इसलिए इसे दांतो से चबाना नहीं चाहिए। ऐसा करने से दांत खराब हो जाते हैं।
  2. वनस्पति वैज्ञानिक डॉक्टर जी.डी. नाडकर्णी का कहना है कि तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रित होता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ती है।
  3. फ्रेच डॉक्टर विक्टर रेसीन का कहना है कि तुलसी एक अदभुत औषधि है।
  4. इम्पीरियल मलेरियल कॉन्फ्रेंस के अनुसार तुलसी मलेरिया की विश्वसनीय और प्रामाणिक दवा है।
  5. डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में पता चला है कि तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो शरीर की मृत कोशिकाओं को ठीक करने में मददगार होता है।
  6. तुलसी का प्रभाव शरीर में पहुंचने वाले केमिकल या अन्य नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान को कम करता है।
  7. टी.बी-मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी कारगर है।
  8. तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन वायु छोड़ता है।
  9. आभामंडल नापने के यंत्र यूनिवर्सल स्केनर के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञ श्री के.एम. जैन द्वारा किए परीक्षण में पता चला कि कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे की 9 परिक्रमा करे तो उसका आभामंडल का प्रभाव क्षेत्र 3 मीटर तक बढ़ सकता है।


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Worship of Shri Krishna is incomplete without Tulsi, according to scientific research, Tulsi contains antioxidants which are helpful in healing dead cells.


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श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी है तुलसी के बिना, वैज्ञानिक शोध के अनुसार तुलसी में होता है एंटीऑक्सीडेंट जो मृत कोशिकाओं को ठीक करने में होता है मददगार श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी है तुलसी के बिना, वैज्ञानिक शोध के अनुसार तुलसी में होता है एंटीऑक्सीडेंट जो मृत कोशिकाओं को ठीक करने में होता है मददगार Reviewed by Prbnews on August 11, 2020 Rating: 5

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