फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा दिए बिना डिग्री नहीं मिलेगी; आसान Q&As से समझिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कॉलेज की फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने यूजीसी की 6 जुलाई को जारी गाइडलाइन को कायम रखा है। यानी राज्यों को 30 सितंबर से पहले फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षाएं करानी ही होंगी। राज्य सरकार परीक्षा टाल सकती है, लेकिन अंतिम फैसला यूजीसी का ही होगा। यह भी तय हो गया है कि स्टूडेंट्स परीक्षा पास किए बिना हायर क्लासेस में प्रमोट नहीं होंगे। इस फैसले के बाद भी स्टूडेंट्स के कई भ्रम बरकरार है, जिन्हें दूर करने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बनी स्थिति को इन Q&As के जरिए सामने रख रहे हैं...

सबसे पहले, यह पूरा विवाद क्या है?

  • कोरोनावायरस महामारी से बचाव के लिए देशभर में मार्च में लॉकडाउन लगा था। तब से स्कूल-कॉलेज बंद हैं। कई कॉलेजों में परीक्षाएं नहीं हो सकी हैं। फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षाएं भी नहीं हुई हैं।
  • कुछ राज्य और स्टूडेंट्स चाहते थे कि कोरोना के डर की वजह से परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाए। इंटरनल असेसमेंट या पिछले वर्षों के परफॉर्मंस के आधार पर प्रमोशन दे दिया जाए। यूजीसी भी राजी हो गई।
  • लेकिन फिर पेंच फंस गया फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर। यूजीसी के कानून के तहत बिना परीक्षा लिए डिग्री नहीं दी जा सकती। तब, यूजीसी ने 6 जुलाई को गाइडलाइन जारी की। राज्यों और यूनिवर्सिटीज से कहा कि 30 सितंबर से पहले फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षा करवा लें।
  • महाराष्ट्र में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कॉलेजों में सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई थी। यूजीसी की गाइडलाइन आई तो टकराव की स्थिति बन गई। वहीं, कुछ स्टूडेंट्स भी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट में पहुंच गए।

स्टूडेंट्स/टीचर एसोसिएशन का क्या कहना था?

  • कोरोना महामारी को देखते हुए स्टूडेंट्स की परीक्षा लेना उनकी जान को जोखिम में डालेगा। उनके जीने के अधिकार पर इसका असर पड़ेगा। यूजीसी ने अपनी गाइडलाइन में स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया है।
  • महामारी और लॉकडाउन की वजह से क्लासेस नहीं हो सकी है। ऐसे में आवश्यक संख्या में क्लासेस नहीं होने के बावजूद परीक्षाएं लेना मनमाना और अतार्किक फैसला है।
  • फाइनल ईयर/सेमेस्टर के कई स्टूडेंट्स ने जॉब इंटरव्यू क्लीयर कर लिए हैं या हायर कोर्सेस में एडमिशन ले लिया है। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द डिग्री सर्टिफिकेट दे दिए जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

यूजीसी और राज्य सरकार का क्या तर्क था?

  • दरअसल, इस पूरे मुद्दे में दो कानून आमने-सामने थे। यूजीसी का कानून और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट। महाराष्ट्र ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत ही परीक्षाएं रद्द कर स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का फैसला किया था।
  • यूजीसी का कहना है कि देश में जब भी हायर एजुकेशन की बात आएगी तो उसका कहा शब्द ही अंतिम होगा। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी उसके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकती।

इन दलीलों को सुनकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को परीक्षाओं को स्थगित करने का अधिकार है, लेकिन परीक्षाओं को रद्द कर स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का अधिकार नहीं है।
  • राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 30 सितंबर की डेडलाइन को बढ़ाने पर यूजीसी से बात कर सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला यूजीसी का ही होगा कि डेडलाइन बढ़ाने की अनुमति दी जाए या नहीं।

... तो क्या महाराष्ट्र में परीक्षाएं नहीं होंगी?

  • जरूर होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जारी यूजीसी की गाइडलाइन को कायम रखा है। यह भी कहा कि बिना परीक्षा के किसी को भी डिग्री नहीं दी जा सकेगी। उसे प्रमोट नहीं किया जा सकेगा।
  • यदि किसी राज्य सरकार ने इस फैसले के बाद भी 30 सितंबर से पहले परीक्षाएं नहीं कराई तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। यूजीसी स्टूडेंट्स की डिग्री जारी नहीं करेगी, इस वजह से यह उनके लिए भी अच्छा नहीं है।
  • देश की 818 में से 620 यूनिवर्सिटियों ने अपनी फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाएं पूरी कर ली हैं या पूरी करने ही वाली थी, जब लॉकडाउन लगा। ऐसे में लगता नहीं कि 30 सितंबर की डेडलाइन में यूजीसी नरमी देने वाली है।

क्या घर से परीक्षा दी जा सकती हैं?

  • बिल्कुल दी जा सकती हैं। यूजीसी ने यूनिवर्सिटियों को ऑफलाइन, ऑनलाइन या ब्लेंडेड मोड में परीक्षाएं कराने की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि एग्जाम सेंटर जाने की जरूरत नहीं है।
  • ऑनलाइन प्रोक्टरिंग के आधार पर होम-बेस्ड एग्जाम भी ली जा सकती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी तो ओपन-बुक एग्जाम ले रही है, जिससे स्टूडेंट्स को फ्लेक्जिबिलिटी मिल गई है।
  • एग्जाम कैसे ली जाए, यह फैसला यूनिवर्सिटी का रहेगा। भले ही स्टूडेंट्स ऑनलाइन परीक्षा चाहे, यदि यूनिवर्सिटी ऑफलाइन या सेंटर पर परीक्षा चाहेगी, तो वैसे ही देनी होगी।

यदि विदेश में एडमिशन हो गया है तो क्या होगा?

  • बिल्कुल। अच्छी बात है कि पुराने परफॉर्मंस के आधार पर एडमिशन मिल गया है, लेकिन उस संस्थान को बताना ही बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है।
  • फाइनल ईयर की परीक्षा का रिजल्ट आने तक एडमिशन को होल्ड रखा जाएं। सूचना छिपाने की कोशिश न करें क्योंकि देर-सबेर देशी संस्थान हो या विदेशी, स्टूडेंट्स से डिग्री सर्टिफिकेट जरूर मांगेगा।

अब क्या होगा? परीक्षाएं कब होंगी?

  • यूजीसी ने तो कह दिया है कि 30 सितंबर की डेडलाइन है। यूनिवर्सिटियों को फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा तब तक खत्म करनी होगी। लेकिन, आपका राज्य समय बढ़ाने की अपील भी कर सकता है। तब यूजीसी का फैसला अंतिम होगा।

फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या परिस्थिति बनेगी, संक्षेप में यह ग्राफिक्स आपको बताएगा। यदि कोई स्टूडेंट भ्रमित हो रहा है, तो उसके साथ इसे शेयर करें...



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