दान-पुण्य केवल परलोक में सुख देता है, लेकिन संस्कारी संतान इसी जन्म में सुख देती है, इसीलिए संतान को अच्छे संस्कार देना चाहिए
महाकवि कालिदास को सम्राट विक्रमादित्य का समकालीन थे। वे विक्रमादित्य के नौ रत्नों में से एक थे। कालिदास दिखने में बहुत सुंदर थे, लेकिन प्रारंभिक जीवन में वे अनपढ़ ही थे। उनका विवाह विद्योत्तमा नाम की सुंदर और बुद्धिमान राजकुमारी से हुआ था। विवाह के बाद ही कालिदास संस्कृत भाषा के महान कवि और नाटककार बने। जानिए कालिदास के कुछ ऐसे विचार, जिन्हें अपनाने से हमारी कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं...




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दान-पुण्य केवल परलोक में सुख देता है, लेकिन संस्कारी संतान इसी जन्म में सुख देती है, इसीलिए संतान को अच्छे संस्कार देना चाहिए
Reviewed by Prbnews
on
September 28, 2020
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