श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जब ज्ञान की धारा जब बहती है तो सबसे पहले मोह को नष्ट करती है, मोह को इसलिए नष्ट करती है क्योंकि मोह अज्ञान है

दुखों का एक कारण मोह भी है। मोह से अज्ञान बढ़ता है और जीवन में समस्याएं शुरू होने लगती हैं। महाभारत में धृतराष्ट्र को दुर्योधन से इतना मोह था कि वह अपने पुत्र को गलत काम करने से भी रोक नहीं सके। धृतराष्ट्र को पुत्र मोह की वजह से धर्म-अधर्म ज्ञान ही नहीं रहा था। अंत में सबकुछ बर्बाद हो गया।

आध्यात्मिक गुरु ओशो ने अपने एक लेख में बताया है कि महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था जब ज्ञान की धारा बहती है तो सबसे पहले मोह को नष्ट करती है। मोह को इसलिए नष्ट करती है, क्योंकि मोह अज्ञान है।

यूनान का सम्राट सिकंदर पूरी दुनिया का जीत लेना चाहता था। एक दिन एक नागा साधु ने सिकंदर से कहा कि तू ये पूरी दुनिया जीत लेगा, उसके बाद क्या करेगा? क्योंकि, इसके अलावा दूसरी कोई दुनिया है ही नहीं। इतना कहकर संत जोर-जोर से हंसने लगा।

संत की बातें सुनकर सिकंदर निराश हो गया था। सिकंदर ने संत से कहा कि आप मुझ हंसिए मत। ये बात सच ही है, लेकिन मैंने आज तक ये बात सोची ही नहीं थी। सिकंदर ने अभी दुनिया जीती नहीं थी, लेकिन जीतने के विचार से ही वह निराश हो गया था। क्योंकि, दुनिया जीतने के बाद कोई और मोह नहीं बचेगा।

सिकंदर ने संत से कहा कि आप हंस क्यों रहे हैं? संत ने जवाब दिया कि तू पूरी दुनिया जीत लेगा, तब भी तुझे निराशा ही मिलेगी। क्योंकि, तू दुनिया को जीतने के मोह में बंधा है। जबकि मेरे पास कुछ नहीं है, लेकिन मैं हमेशा खुश रहूंगा। क्योंकि, मुझे किसी चीज का मोह नहीं है।

मोह की वजह से जीवन में दुख ही आते हैं। मोह घर-परिवार से हो सकता है, सफलता का मोह हो सकता है, सुख-सुविधा और मान-सम्मान का मोह का हो सकता है। जहां मोह रहेगा, वहां दुख तो आएगा ही। मोह जब सफल होता है तो दुख मिलता है और जब असफल होता है तब भी दुख ही मिलता है।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब को मोह त्याग देता है तो उसे मेरी कृपा मिल जाती है। मोह रहित व्यक्ति परम आनंद प्राप्त करता है। इसीलिए मोह का त्याग करना चाहिए और जो हमारे पास है, उसी में संतुष्ट रहना चाहिए। ज्यादा पाने का मोह रहेगा तो दुख बढ़ना तय है।



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श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जब ज्ञान की धारा जब बहती है तो सबसे पहले मोह को नष्ट करती है, मोह को इसलिए नष्ट करती है क्योंकि मोह अज्ञान है श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जब ज्ञान की धारा जब बहती है तो सबसे पहले मोह को नष्ट करती है, मोह को इसलिए नष्ट करती है क्योंकि मोह अज्ञान है Reviewed by Prbnews on October 09, 2020 Rating: 5

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