तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी मंदिर में तीन मुद्राओं में हैं भगवान विष्णु की प्रतिमा

अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को पद्मनाभ एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी व्रत का महत्व खुद श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। पद्म पुराण के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने का भी विधान है। तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ मंदिर में इस एकादशी पर विशेष पूजा की जाती है। भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाभ स्वामी मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। माना जाता है इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
तिरुवनंतपुरम के बीच में बना विशाल किले की तरह दिखने वाला पद्मनाभ स्वामी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। महाभारत के मुताबिक श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम इस मंदिर में आए थे और यहां पूजा-अर्चना की थी। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना 5000 साल पहले कलयुग के प्रथम दिन हुई थी, लेकिन 1733 में त्रावनकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। यहां भगवान विष्णु का श्रृंगार शुद्ध सोने के आभूषणों से किया जाता है।

एकादशी पर विशेष पूजा
भगवान विष्णु का मंदिर होने से यहां एकादशी पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस तिथि को यहां पर्व के रुप में मनाया जाता है। इस दिन सोने के गहनों से भगवान का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी और कार्तिक महीने में आने वाली देव प्रबोधिनी एकादशी पर यहां भगवान पद्मनाभ के विशेष दर्शन करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

दीपक के उजाले में होते हैं दर्शन
मुख्य कक्ष जहां विष्णु भगवान की लेटी हुई मुद्रा में प्रतिमा है, वहां कई दीपक जलते हैं। इन्हीं दीपकों के उजाले से भगवान के दर्शन होते हैं। स्वामी पद्मनाभ की मूर्ति में भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल पर जगत पिता ब्रह्मा की मूर्ति स्थापित है। भगवान पद्मनाभ की मूर्ति के आसपास दोनों रानियों श्रीदेवी और भूदेवी की मूर्तियां हैं। भगवान पद्मनाभ की लेटी हुई मूर्ति पर शेषनाग के मुंह इस तरह खुले हुए हैं, जैसे शेषनाग भगवान विष्णु के हाथ में लगे कमल को सूंघ रहे हों। यहां मूर्ति का दर्शन अलग-अलग दरवाजों से किया जा सकता है।

साल मंजिला सोने से जड़ा गोपुरम
मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही यहां श्रद्धालुओं के लिए नियम भी हैं। पुरुष केवल धोती पहनकर ही मंदिर में जा सकते हैं और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना जरूरी है। अन्य किसी भी लिबास में प्रवेश यहां वर्जित है। मंदिर में एक सोने का खंभा बना हुआ है। मंदिर का स्वर्ण जड़ित गोपुरम सात मंजिल का है। जिसकी ऊंचाई करीब 35 मीटर है। कई एकड़ में फैले इस मंदिर में अद्भुत कारीगरी की गई है।

समुद्र किनारे स्नान
श्री पद्मनाभ मंदिर की एक विशेषता है कि इस मंदिर में भगवान विष्णु की शयनमुद्रा, बैठी हुई और खड़ी मूर्तियां स्थापित की गई हैं। गर्भगृह में भगवान विष्णु की शयनमुद्रा में मूर्ति का शृंगार फूलों से किया जाता है। भगवान विष्णु की खड़ी मूर्ति को उत्सवों के अवसर पर मंदिर से बाहर ले जाते हैं। वर्ष में दो बार धार्मिक समारोह होता है। इस समारोह में ‘आउत’ (पवित्र स्नान) किया जाता है। इस समारोह में भगवान विष्णु , नरसिंह और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को नगर के बाहर समुद्र किनारे पर ले जाकर स्नान कराया जाता है।



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The statue of Lord Vishnu is in three postures in the Padmanabha Swamy temple of Thiruvananthapuram


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तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी मंदिर में तीन मुद्राओं में हैं भगवान विष्णु की प्रतिमा तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ स्वामी मंदिर में तीन मुद्राओं में हैं भगवान विष्णु की प्रतिमा Reviewed by Prbnews on October 26, 2020 Rating: 5

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