अपनी प्रसन्नता को दूसरों की प्रसन्नता में मिला लेना ही निस्वार्थ प्रेम है, जो लोग निराश नहीं होते, वे ही सच्चे साहसी होते हैं

गायत्री परिवार से संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार हमारा ज्ञान सेना की तरह है। ज्ञान से ही हम हमारी बुराइयों को खत्म कर सकते हैं। इसीलिए वे माता-पिता धन्य हैं, जो अपनी संतानों के लिए ज्ञान बढ़ाने वाली श्रेष्ठ पुस्तकें छोड़ जाते हैं।

श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने प्रवचनों में और अपनी किताबों में जीवन को सुखी और सफल बनाने के सूत्र बताए हैं। इन सूत्रों को जीवन में उतार लेने से हमारी कई समस्याएं खत्म हो सकती हैं। जानिए उनके कुछ ऐसे सूत्र, जिनसे हमारी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं...



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अपनी प्रसन्नता को दूसरों की प्रसन्नता में मिला लेना ही निस्वार्थ प्रेम है, जो लोग निराश नहीं होते, वे ही सच्चे साहसी होते हैं अपनी प्रसन्नता को दूसरों की प्रसन्नता में मिला लेना ही निस्वार्थ प्रेम है, जो लोग निराश नहीं होते, वे ही सच्चे साहसी होते हैं Reviewed by Prbnews on October 28, 2020 Rating: 5

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