स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से नहीं दें सूर्य को अर्घ्य; तांबे के लोटे से न चढ़ाएं दूध

आज छठ पर्व आखिरी दिन है। श्रवण नक्षत्र, सप्तमी तिथि के साथ ध्रुव और स्थिर नाम के शुभ योगों में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जा रहा है। भगवान सूर्य की धातु सोना और तांबा है। इसलिए भविष्य और स्कंदपुराण के मुताबिक तांबे के बर्तन से अर्घ्य देना चाहिए। जिससे रोग खत्म होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ बातों का खासतौर से ध्यान रखना चाहिए। जैसे अर्घ्य देते वक्त कौन सा मंत्र बोलें, कैसे दें, सूरज को चढ़ाए हुए जल का क्या करें। इन सब चीजों का ध्यान रखने पर ही पूजा का पूरा फल मिल पाता है।

सप्तमी भगवान सूर्य की जन्म तिथि
छठ पर्व के आखिरी दिन यानी सप्तमी तिथि पर उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। ग्रंथों में बताया गया है कि सूर्य की जन्म तिथि सप्तमी ही है। इसका नाम मित्रपदा भी है। इसलिए इस तिथि के स्वामी भी सूर्य ही हैं। वहीं, कार्तिक महीने में सूर्य के धाता रूप की पूजा की जाती है। माना जाता है भगवान भास्कर के इसी रूप के प्रभाव से सृष्टि की रचना हुई है।

5 सरल स्टेप्स में सूर्य को अर्घ्य
तांबे के बर्तन में जल के साथ लाल चंदन, लाल फूल और कुछ गेहूं के दानें डाल लें।
उगते सूर्य को देखते हुए अर्घ्य दें और तांबे के बर्तन में गिराएं यानी इकट्ठा करें।
पीतल के लोटे से दूध चढ़ाएं और किसी साफ बर्तन में इकट्ठा करें।
लाल फूल, लाल चंदन और अन्य पूजा सामग्री सूर्य को चढ़ाएं।
अर्घ्य दिए हुए दूध और जल को मदार के पौधे में चढ़ा दें।

सूर्य को अर्घ्य देते वक्त ध्यान रखने वाली बातें
सूर्य को अर्घ्य देते वक्त हाथ सिर के उपर होने चाहिए।
अर्घ्य वाले जल की धारा में ही सूर्य के दर्शन करना चाहिए।
पानी में नहीं खड़े हैं तो अर्घ्य वाला जल पैरों में नहीं आने दें और किसी तांबे के चौड़े बर्तन में ही इकट्ठा करें।

अर्घ्य के समय का मंत्र
ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्रोच्चार करते हुए सूर्य को जल चढ़ाते हुए प्रणाम करना चाहिए। छठ पूजा के दौरान सुबह के समय गाय के दूध और गंगाजल के साथ अर्घ्य दिया जाता है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के मुताबिक लोक आस्था का यह महापर्व सूर्य और शक्ति के सम्मिश्रण से विशेष महत्वपूर्ण होता है। सांयकालीन अर्घ्य माता षष्ठी के निमित दिया जाता है और प्रात:कालीन अर्घ्य स्वयं प्रत्यक्ष देवता ऊर्जा के प्रदाता भगवान सूर्य नारायण को दिया जाता है।
पं. मिश्र बताते हैं कि आस्था के पावन पर्व छठ के आखिरी दिन अर्घ्य देने के बाद आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य सहस्र नाम का पाठ करना, गायत्री मंत्र का जप श्रेष्ठ माना गया है। धरती के एकमात्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य की आराधना से हमारे जीवन में स्वास्थ्य, तेजस्विता, वैभव, नीरोगिता, स्मरण शक्ति, शक्ति में वृद्धि , सकारात्मक ऊर्जा का संचार, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Do not give to the Sun by steel, plastic or glass utensils; Do not offer milk with copper pot


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3nH9q2H
via IFTTT
स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से नहीं दें सूर्य को अर्घ्य; तांबे के लोटे से न चढ़ाएं दूध स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से नहीं दें सूर्य को अर्घ्य; तांबे के लोटे से न चढ़ाएं दूध Reviewed by Prbnews on November 20, 2020 Rating: 5

No comments:

As Ukraine Makes Inroads in Bakhmut, Devastation Still Reigns

The fight for Bakhmut is now the war’s single longest and bloodiest battle. Although the Ukrainians are making small gains, Russia still con...

Stay Connected

Powered by Blogger.