जहां हरा-भरा रहता है, लोग वहीं खाने आते हैं, जिसकी हालत बिगड़ जाती है, लोग उसे और भी जलाकर सुखी होते हैं

गोस्वामी तुलसीदासजी का जन्म संवत् 1554 में हुआ था। इनका प्रारंभिक नाम रामबोला था। काशी में शेषसनातनजी के पास रहकर तुलसीदासजी ने वेदों का अध्ययन किया। संवत् 1583 में तुलसीदासजी का विवाह हुआ था। विवाह के कुछ बाद ही उन्होंने घर-परिवार छोड़ दिया और संत बन गए।

तुलसीदास द्वारा रचित दोहावली में जीवन प्रबंधन के सूत्र बताए गए हैं। दोहावली के अनुसार जब पेड़-पौधे हरे रहते हैं तब सभी पशु-पक्षी चरने आते हैं। सूख जाने पर जलाकर तापते हैं। जब पेड़ों पर फल लगते हैं तो सभी इनके सामने हाथ फैलाते हैं। यानी जहां हरा-भरा रहता है, वहां लोग खाने के लिए आते हैं, जहां हालत बिगड़ जाती है, वहां उसे और भी जलाकर खुद सुखी होते हैं। जहां धन ज्यादा रहता है, वहां सभी मांगने आते हैं।

यहां जानिए कुछ और ऐसे ही दोहे...



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जहां हरा-भरा रहता है, लोग वहीं खाने आते हैं, जिसकी हालत बिगड़ जाती है, लोग उसे और भी जलाकर सुखी होते हैं जहां हरा-भरा रहता है, लोग वहीं खाने आते हैं, जिसकी हालत बिगड़ जाती है, लोग उसे और भी जलाकर सुखी होते हैं Reviewed by Prbnews on November 19, 2020 Rating: 5

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